Cricketers success story in Hindi | story behind every cricketer


Cricketers success story in Hindi | story behind every cricketer

Cricket motivational story in Hindi


इस लेख में Cricketer success story in Hindi दिया गया है अगर आप परिस्थिति को दोष देते हैं तो यह लेख आपको ज़रूर पढना चाहिए इस लेख में आप उन मशहुर क्रिकटरों के बारें में पढेंगे जो एक समय बेहद गरीब हुआ करते थे।

दोस्तों क्रिकेट सिर्फ खेल ही नहीं बल्कि एक मज़हब बन चुका है और भारत के हर गली कुचे से कोई न कोई क्रिकेटर बनने का सपना जरुर देखता है शायद आप भी उनमें से एक रहें हो।

क्रिकेटर्स की लाइफ स्टाइल को देखकर शायद आपको भी लगता हो की क्या मज़े की लाइफ है..और हममे से कोई न कोई जरुर कहेगा की इन्हें तो सिर्फ खेलने के करोड़ों रुपये मिलते हैं..खैर सबका अपना अपना नज़रिया होता है है लेकिन इस लेख के बाद आपका नज़रिया पूरी तरह बदलने वाला है।

Indian Cricketers success story in Hindi


इस लेख में 5 ऐसे cricketers के बारे में बताया गया है जो आज बेहद रहिशी की जिंदगी जी रहें हैं लेकिन एक समय पर वे इतने गरीब थे की जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते तो चलिए शुरू करें।

1 - यशस्वी जयसवाल - Yashasvi jaysawal motivational story in Hindi


Cricketers success story in Hindi | story behind every cricketer

दोस्तों गरीबी के भी कई परतें होतीं हैं। जिसमें से पहले वे होते होते हैं जिनके पास पैसे भले न हों पर अपने लोग ज़रुर होते हैं और दुसरे वे होते हैं जिनके पास न पैसे होते हैं और न ही कोई अपना होता है।

दोस्तों चौदह-पंद्रह साल का लड़का उत्तर प्रदेश के सुरियावां जिले से भागकर मुंबई आ पहुँचा क्योंकि उसे क्रिकेट से प्यार था। 

मुंबई जैसे शहर में उसका कोई नहीं सिर्फ एक अंकल तथा उनका परिवार रहता था और गरीबों के लिए मुंबई में जिंदगी कितनी कठिन होती है इसका अंदाजा आपको शायद हो।

शुरुवात में यशस्वी एक डेरी में काम किया करते थे जिसमें उन्हें कुछ पैसे मिल जाते थे लेकिन खेलने का पूरा समय नहीं मिल पाता था। एक बार वे काम पर लेट हो गए और डेरी के मालिक नें उन्हें काम से निकाल दिया और कुछ ही दिन में उनके अंकल-आंटी ने भी उन्हें घर से निकाल दिया क्योंकि दो वक़्त खाना देना उन्हें भारी व् खर्चीला लग रहा था।

पंद्रह साल का लड़का मुंबई जैसे शहरों में फूटपाथ पर आ गया था जहाँ पर रोज हजारों सपने जन्म लेते हैं और हजारों दम तोड़ते हैं

लेकिन कहते हैं न जो खुद से हार नहीं मानता उसे कोई नहीं हरा सकता.. कुछ दिन तो यशस्वी ने स्टेशन पर बिता लिए और कई जगहों से ना मिलने के बाद आखिर में उन्हें एक पानी पूरी की लारी पर प्लेट धोने का काम मिल गया।

हुआ यूँ की अब यशस्वी को खाने में पानीपूरी और सोने के लिए फूटपाथ मिल गया था और सबसे बड़ी चीज़ उन्हें अभ्यास करने के लिए समय मिल गया था जिसका वे पूरी लगन के साथ इस्तेमाल करते थे

ऐसे कई महीनों तक चला और एक व्यक्ति की यशस्वी नज़र पड़ी उस व्यक्ती ने यशस्वी से कहा की अगर वो एक टीम के सामने अच्छा खेले तो उसे रहने के लिए टेंट मिल जाएगा और यशस्वी ने ऐसा ही किया उन्होंने बहुत अच्छा खेला।

दोस्तों यशस्वी कहते हैं की उन टेंट के दिनों में उन्हें बहुत तकलीफ होती थी क्योंकि वहाँ न तो बिजली और न ही पानी की व्यवस्था थी और बारिश में हालत और भी बदतर हो जाती थी और कभी कभी उन्हें भरपेट खाना खाए हफ़्तों बीत जाते थे।

इन्हीं तकलीफों के बीच उन्होंने क्रिकेट खेलना जारी रखा और बड़े बड़े लोगों में चर्चा का विषय बन गए और उनके लिए कोच ज्वाला सिंह भगवान् का रूप साबित हुए जिन्होंने उन्हें रहने के लिए घर और जरुरी सुविधाएँ मुहैया करवाई और उन्हें आज का सितारा यशस्वी जयसवाल बनाया।

2- मोहम्मद शामी - Mohammed shami story in Hindi


Cricketers success story in Hindi | story behind every cricketer

भारतीय तेज गेंदबाज़ मोहम्मद शामी अपने शुरुवाती दौर में गरीबी से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। जब उनका सिलेक्शन एक निचली टीम में हुआ तो उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे की वे किसी जगह रुक सके और दो वक़्त खा सके

मोहम्मद शामी उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के एक छोटे से गाँव में रहते थे जहाँ न तो बिजली थी और न ही कोई क्लब.. शामी के पिताजी भी एक समय में क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन गरीबी और मज़बूरी की वजह से वे क्रिकेट छोड़ कर बेहद मामूली रकम पर नौकरी पर लग गए जिससे उनका सिर्फ गुजरा चल पाता था शमी को क्रिकेट क्लब भेजना तो दूर की बात थी।

वे अपने गाँव और अगल बगल के गाँवों में अपने गेंदबाजी को लेकर मशहुर थे इसी वजह से उनके गाँव वालों ने उन्हें एक जोड़ी जूते खरीद कर दिए और उनके संघर्ष में भागीदार बने।

दोस्तों मोहम्मद शामी के पास उस वक़्त कोई ज़मीन नहीं थी जहाँ वे प्रैक्टिस करते इसलिए उन्होंने कब्रिस्तान में ही विकेट बना डाला और अभ्यास करने लगे। इस प्रकार उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उनकी गरीबी को पीछे हटना पड़ा।

3 -मुनाफ पटेल - Munaf Patel life story in Hindi


Cricketers success story in Hindi | story behind every cricketer

गुजरात के पालेज में जन्में मुनाफ़ पटेल जो 2011 विश्वकप में भारतीय टीम का हिस्सा थे उनका शुरुवाती जीवन बेहद मुफलिसी में गुजरा। पैसों की कमी के कारण वे पढ़ाई न कर सके और अपने पिता की मदद करने उनके साथ जाने लगे।

दोस्तों उनके परिवार की हालत इतनी खस्ता थी उनके पिता को दो वक़्त के भोजन के लिए पुरे दिन मेहनत करना पड़ता। जैसे ही मुनाफ पटेल थोड़े बड़े हुए और क्रिकेट में ज्यादा समय देने लगे तो उनके परिवार से उन्हें काफी खरी खोटी सुननी पड़ती।

लेकिन उन्होंने क्रिकेट को खुद से दूर करने के बजाय मेहनत को ही बढ़ा दिया उनके जानने वाले कहते हैं की उनके पास जूते व क्रिकेट के कपड़े खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे इसलिए वे कई बार चप्पल पहनकर बोलिंग करते देखे गए थे।

दोस्तों अगर आपने कभी सीजन बॉल पर तीस या चालीस ओवर मैच खेला हो तो आप अच्छे से महसूस कर पाएंगे अच्छे जूतों के बावजूद पैरों का क्या हाल होता है तो सिर्फ चप्पलों में खेलना कैसा होता होगा? खैर

मुनाफ पटेल कहते हैं की अभ्यास के दौरान जब उन्हें भूख लगती थी तो वे पानी पीकर अपनी भूख शांत कर लेते ताकि दोपहर की टिफ़िन को वे शाम को खा सके। दोस्तों! जब मुनाफ पटेल का चयन भारतीय टीम में हुआ तो उनके आँखों में आँसू थे उनके सिलेक्ट होने की ख़ुशी में उनके पुरे गाँव ने जश्न मनाया था। आज मुनाफ़ पटेल के पास करोड़ों की प्रॉपर्टी है लेकिन आज भी वे उतने ही सिंपल हैं जितने वे पहले थे।

4- ज़हीर खान - Zaheer khan story in Hindi


Cricketers success story in Hindi | story behind every cricketer

दोस्तों एक कहावत है की किसी काम को न करने के लिए हज़ार बहानें मौजूद होते हैं लेकिन करने के लिए सिर्फ एक वजह ही काफी होती है। इस कहावत को काफी हद तक आप जहीर खान पर सही साबित होते पाएंगे।

जहीर खान को भारतीय तेज गेंदबाज़ी का सितारा कहा जाता है क्योंकि उनके जैसे बाएँ हाथ के तेज गेंदबाज़ अब तक नहीं मिला है। लेकिन इस काबिलियत को पाने से पहले उन्होंने अपनी गरीबी, भूख-प्यास, दर्द और परिस्थितियों से लड़कर उन्हें धुल चटाया है।

दोस्तों क्रिकेट के जानकार कहते हैं की जहीर खान और अन्य तेज गेंदबाजों में सिर्फ एक फर्क है की जहीर खान हर एक गेंद को लड़ाई के रूप में लेते थे उनका मानना था की हर क्षेत्र में जो लड़ता है वही सर्वाइव कर पाता है।

जहीर खान अपने शुरुवाती दिनों में अभ्यास करने के लिए अपने घर से दूर अपनी आंटी के साथ रहते थे। जी नहीं! उनके घर पर नहीं बल्कि हॉस्पिटल के एक खाली कमरे में। दरअसल उनकी आंटी एक नर्स थीं और उनका घर इतना बड़ा नहीं था की उनके तीन बच्चों के साथ ज़हीर को भी रख सकें।

इसलिए अस्पताल के एक स्टोर रूम में एक लकड़े के बिस्तर पर उन्हें रात काटने को मिल जाती। दोस्तों उनकी आंटी की जॉब सुबह 10 बजे से शुरू होती थी और जहीर का अभ्यास का वक़्त सुबह साढ़े छः बजे का होता था इसलिए वे पैसे की कमी के कारण सुबह बिना कुछ खाए ही अभ्यास पर चले जाते।

कुछ समय बाद उनके कोच ने उन्हें एक नौकरी दिलाई जिसे कर उन्होंने अपनी आंटी की मदद की और खुद भी क्रिकेट खेल सके।

5 - उमेश यादव - Umesh yadav story in hindi


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दोस्तों सन 2012 में जब भारतीय टीम इंग्लैंड में एक जीत के लिए संघर्ष कर रही थी तब एक गेंदबाज़ ने डेब्यू किया। छोटे कद का एक पतला सा दिखने वाला बॉलर जब 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंदबाजी करना शुरू किया तब बहुत से क्रिकेट विशेषज्ञों ने उसे भारतीय तेज गेंदबाज़ी का भविष्य तक कहने लगे।

दोस्तों उमेश यादव ने अपने क्रिकेट के लिए बहुत संघर्ष किया इस लिस्ट में इन्हें पहले नंबर पर रख सकते थे लेकिन यहाँ ऐसे क्रिकेटर्स को शामिल किया गया है जिनके पास बिलकुल भी सपोर्ट नहीं था।

दोस्तों उमेश यादव का परिवार बेहद ही गरीब था उनके पिता कोयले की खान में काम करते थे और उसी से उनके पुरे परिवार का गुजरा होता था।

शुरुवात में उमेश यादव ने क्रिकेट को छोड़ पुलिस की तैयारी करने की सोची लेकिन क्रिकेट के प्यार ने उन्हें यह नहीं करने दिया। एक बार उमेश यादव को सेलेक्टर्स ने यह कहकर बाहर निकाल दिया था की जाओ पहले ढंग के जूते पहन कर आओ और अगर नहीं खरीद सकते तो क्रिकेट छोड़ दो।

उमेश यादव कहते हैं की उस दिन वे बहुत रोएं लेकिन साथ ही उन्होंने कसम खा ली कुछ भी हो अब मैं हार नहीं मानूंगा…. उसके बाद नतीजा आपके सामने है।


दोस्तों इस लेख Cricketers success story in Hindi को बनाने का उद्देश्य यह नहीं है की बाकी के अन्य क्रिकेटर्स ने कम संघर्ष किया है बल्कि यह है की किस प्रकार एक आम इंसान भी सफलता के पायदानों को पार कर सकता है। हमारे जीवन में भले ही कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हो अगर हममे लड़ने का जुनून है तो कोई भी परिस्थिति हमारे सामने टिक नहीं पाएंगी। आशा है की यह लेख आपको पसंद आया होगा और अगर इस लेख दूसरा पार्ट आप चाहते हैं तो कमेन्ट बॉक्स में पार्ट-2 लिखें।

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